तिलकामांझी
| Tilka Majhi | |
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Statue of Tilka Majhi, Dumka, Jharkhand | |
| जन्म |
11 February 1750[१] Tilakpur, Sultanganj, Bengal Subah, (now in Bihar, India) |
| मृत्यु |
13 January 1785 Bhagalpur, Bengal Presidency, British India (now in Bihar, India) |
| मृत्यु का कारण | Execution by hanging |
| राष्ट्रीयता | Indian |
| व्यवसाय |
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तिलका माँझी (11 फरवरी 1750 – 13 जनवरी 1785), भारत केरौ पहलौ स्वतंत्रता सेनानी छेलै, जे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ 1771 सँ ल॑ क॑ 1785 मँ अपनौ गिरफ्तारी आरू फाँसी होय तलक विद्रोह करलकै । हुनी एगो भारतीय आदिवासी नेता छेलै आरू हुनका सबसे पहलौ स्वतंत्रता सेनानी बतैलो गेलौ छै जे ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन के खिलाफ स्थानीय निवासी सब क॑ संगठित करलकै आरू कहलौ जाय छै कि अगस्तस क्लीवलैंड क॑ विषैला तीर सँ मारी देलअ छेलै। हुनी ब्रिटिश राज के खिलाफ १७८० ईस्वी म॑ सशस्त्र विरोध के नेतृत्व करने छेलै। तिलकामांझी, तिलकामाझी या फिरू तिलक मांझी अमर सेनानी के स्मृति म॑ भागलपुर मँ स्थापित "तिलकामांझी चौक" स्थापित करलो गेलो छै जे शहर के पहचान बनी गेलो छै। हुनको नाँव प भागलपुर मँ तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय भी स्थापित छै ।
जिनगी-कथा
[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]सामूहिक याददाश्त के अनुसार, तिलका मांझी केरौ जन्म बंगाल सूबा (अखनको बिहार) के सुल्तानगंज केरौ तिलकपुर गाँव म॑ होलो छेलै, जेकरा पारंपरिक रूप स॑ संताल मानलौ जाय छै, हालाँकि कुछ स्रोत ई बात क॑ न॑ मानै छै। बचपन म॑ ही वू तीरंदाजी, जंगली जानवर के शिकार, नदी पार करै के आरू ऊँचौ-ऊँचौ गाछी प॑ चढ़ै के कौशल सीखी लेलकै।
ओकरो नाम "तिलका" (जेकरऽ मतलब "पहाड़िया भाषा" म॑ "गुस्सा वाला लाल आँख वाला आदमी" होय छै) ओकरो उग्र स्वभाव के कारण देलो गेलो छेलै। एगो गाँव के मुखिया के रूप म॑, उ "मांझी" के उपाधि धारण करलकै, जे पहाड़िया आरू संताल दूनू समुदाय म॑ एगो नेता के संकेत दै छै। मांझी पूजा करै आरू संताल समुदाय केरौ नेतृत्व करै म॑ एगो महत्वपूर्ण भूमिका निभैने छेलै। हुनको सम्मान "मांझी बाबा" के रूप म॑ करलौ जाय छेलै। हुनको बाबु के नाम सुंदरा मुरमू छेलै।
तिलका मांझी 1784 ईस्वी म॑ ब्रिटिश के खिलाफ हथियार उठैलै छेलै, जे 1857 केरऽ भारतीय विद्रोह स॑ आधा सदी स॑ भी अधिक पहिने के बात छै। वू मुख्य रूप स॑ संताल आदिवासी सिनी क॑ ब्रिटिश के संसाधन कब्जा करै आरू शोषण के खिलाफ लड़ै लेली एगो सशस्त्र समूह बनाबै लेली संगठित करलकै।
1784 म॑ ब्रिटिश के खिलाफ पहलौ सशस्त्र विद्रोह भेलै, आरू ई संताल विद्रोह के शुरुआत छेलै। ई 1770 के अकाल आरू विलियम पिट द यंगर स॑ प्रभावित कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के आदेश के कारण छेलै— कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स न॑ जमींदारी के निपटारा प॑ दस साल केरौ आदेश जारी करलकै। एकरौ परिणाम ई भेलै कि स्थानीय जमींदार आरू संताल ग्रामीण सिनी के बीच बातचीत करै के मौका कम मिललै। मांझी नँ एगो गुलेल (गुलेल के समान) सँ ब्रिटिश आयुक्त लेफ्टिनेंट अगस्तस क्लीवलैंड आरू राजमहल पँ हमला करलकै। ब्रिटिश न॑ तिलकापुर वन क॑ चारो तरफ स॑ घेरी लेलकै जहाँ स॑ उ अपनौ काम करै छेलै, हालाँकि उ आरू ओकरो आदमी सिनी कई सप्ताह तलक ओन्जाँ रुकलो रहलै।
जबअ वू आखिरकार 1784 मँ पकड़ाय गेलै, त॑ओकरा घोड़ा के पूँछ स बान्ही क भागलपुर म कलेक्टर के निवास स्थान तलक घसीटी क ल गेलौ गेलै। वैंजां, हुनको फटलो-कटलो बदन क एगो बऽड़ के गाछ स लटकाय देलो गेलै।
एकरहो देखौ
[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]बाहरी कड़ी
[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]संदर्भ
[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]- ↑ Singh 1985, p. 121, "He is said to have been born on 11 February 1750, which is too exact to be true, and is given a life-span of 1750-1784".