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कौकङा

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कौकङा एगो पानी आरू कादो मँ रहै वाला जीव छेकै।

केकड़ा

कौकड़ा (Blue) आर्थ्रोपोडा संघ केरौ एगो जंतु छेकै । ऐकरो शरीर गोलाकार तथा चापटो होय छै। सिरोवक्ष (सिफेलोथोरेक्स) आरू उदर मँ बँटलौ रहै छै। एकरो पेट बहुत छोटो होय छै। एकरो सिरोवक्ष के अधर वाला भाग मँ पाँच जोड़ चलन पाद मिलै छै। सर पर एगो जोड़ा सवृन्त संयुक्त नै मिलै छै। एकरो श्वसन गिल्स सँ होय छै। कौकड़ा क पकाय क खैलो भी जाय छै।

कौकड़ा दुनिया केरो हर समुद्र द्वीपो प पैलो जाय छै। इनमें से अधिकतर मीठे पानी के हैं और जमीन पर भी रहते हैं। खारे और मीठे पानी के केकड़ों प्रजातियां करीब 850 हैं और भी इनमेसे के मिलाकर ४ हजार से ज्यादा है। कहा जाता है कि केकड़ों का अस्तित्व जुरासिक काल से है। इसके कई प्रमाण वैज्ञानिको/जीववैज्ञानिकों ने खोजे हैं। केकड़े अक्सर पानी मे निचली सतह पर ही रहते है। ये तिरछे चलते है।

लक्षण[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]

  • यह जलीय जंतु होता है जो जल प्रणाली की तलछटी में रहता है।
  • इसका शरीर सिफैलोथोरेक्स (Cephalothorex) और उदर में विभाजित रहता है तथा उदर बहुत छोटा होता है।
  • सिफैलोथोरेक्स की चौड़ाई लंबाई से ज्यादा होती है।
  • इसके सिर पर एक जोड़ा ऐंटेन्यूल्स (Antennules), एक जोड़ा श्रृंगिका (Antenna) और एक जोड़ी संवृंत संयुक्त नेत्र (Compound eye) होते हैं।
  • इसके वक्षीय उपांगों (Appendages) में प्रथम जोड़ा मैक्जिलीपीड्स कीलेट (Chelates) और 4 जोड़े प्रचलन पाद (Walking-legs) होते हैं।
  • इसके उदर में प्लियोपोड्स (Pleopods) अल्प विकसित यूरोपपोड्स (Uropods) नहीं पाए जाते हैं।
  • इसमें श्वसन क्लोम द्वारा होता है।
  • यह एक लिंगी होता है। जीवन वृत्त में जूइया (Zoea) नामक लार्वा अवस्था होती है जिसके कायंतरण से वयस्क का विकास होता है।

छबिदीर्घा[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]

सन्दर्भ[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]