यूजर:Manoj kumar poddar mahi
दहेज मोचन
एके रे दहेज खातिर,
बिगड़लऽ समाज।
सुनऽ बाबू हो सुनऽ भैया हो,
कैन्ह॑ नी करै छोऽ परहेज।
घरे -घर मॅं बेटी कानै छै,
होवै छै बाचाल।
मैयो - बाबू भिं खुश कहां छै,
बौआं ठोकै छै ताल।
सुनऽ बाबू हो सुनऽ भैया हो,
कैन्ह॑ नी करै छोऽ परहेज।
चुनियां - मुनियां घटी गेलै अब॑,
घटी गेलै किलकारी।
गांव शहर मॅं बढ़ी गेलै,
भ्रूण हत्या केरऽ महामारी।
सुनऽ बाबू हो सुनऽ भैया हो,
कैन्ह॑ नी करै छोऽ परहेज।
बेटा उमर पैंतालिस कैल्ह॑ ,
राखी दहेज खियाल।
जोड़ी खोजलौ प॑ नै मिल्हौं,
भेजै छोऽ दलाल।
सुनऽ बाबू हो सुनऽ भैया हो,
कैन्ह॑ नी करै छोऽ परहेज।
कोय बेटी त॑ शूली चढ़ै छै,
कोय जरै छै आग।
दहेज के दानव रोजे डॅंसै छै,
बनी क॑ विषधर नाग।
सुनऽ बाबू हो सुनऽ भैया हो,
कैन्ह॑ नी करै छोऽ परहेज।
रोजे आतंकी बढ़लऽ जाय छै,
बेटी बनै छै बम।
दहेज के दानव रुकै कहां छै?
चलै बदली क॑ ढंग।
सुनऽ बाबू हो सुनऽ भैया हो,
कैन्ह॑ नी करै छोऽ परहेज।