यूजर:संजीव कुमार झा
स्वरूप
अंगिका चौमासा लोकगीत
चैत हे सखि , बेली , चमेली , भंवरा लेलकै लुभाय हे ।
कृषक भैया करै , दौनी ओसनियां , मन ही मन हरसाय हे ।।
अंगिका चौमासा लोकगीत
चैत हे सखि , बेली , चमेली , भंवरा लेलकै लुभाय हे ।
कृषक भैया करै , दौनी ओसनियां , मन ही मन हरसाय हे ।।