बोरज़ूया
बोरज़ूया | |
|---|---|
बोरजूया केरौ कलाकृति | |
| Born | 5th century – 6th century |
| Died | 6th century |
| Education | Academy of Gondishapur (possibly) |
| Known for | Translating many books into Pahlavi |
| Medical career | |
| Profession | Physician |
बोरज़ूया (या बुरज़ोए या बुरज़ोय या बोरज़ोय, फ़ारसी: بُرْزویه) ससानियन युग के अंत के, खुसरो प्रथम के समय के एगो फ़ारसी बैद (चिकित्सक) छेलै ।
हुनी संस्कृत सँ पहलवी (मध्य फ़ारसी) मँ भारतीय पंचतंत्र के अनुवाद करलै छेलै. ओकरो ई अनुवाद आरूढ संस्कृत के वू मूल संस्करण, जेकरा पर हुनी काम करलै छेलै, दूनो हेराय गेलै । हालाँकि, ई सभ हेराए सं पहिनै, ओकरो पहलवी संस्करण के इब्न अल-मुक़फ़्फ़ा कालीला वा-दिमना या द फेबल्स ऑफ़ बिदपई नाम से अरबी में अनुवाद करी चुकलो रहै ।
कलिला वा दिमना केरऽ परिचय में बोरज़ूया के एगो आत्मकथा प्रस्तुत करलऽ गेलऽ छै। ई विचार के अलावे, ज्ञान आरू आंतरिक विकास जेकरा सँ मानवतावादी भावना प॑ आधारित चिकित्सा के अभ्यास करै लेली प्रेरणा मिललै, बोरजूया के सत्य के खोज, स्थापित धार्मिक विचारऽ के प्रति ओकरऽ संदेह, आरू बाद के संयमित जीवन कुछ विशेषता छै जेकरा पाठ में स्पष्ट रूप स॑ दरसैलो गेलऽ छै।
भारत के जतरा
[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]खोसरो प्रथम द्वारा बोरजुया क॑ भारत भेजलऽ गेलऽ रहै ताकि ऊ एगो ऐसनऽ पौधा खोजअ सक॑ जे मरलौ आदमी क॑ जिनगी दिअ सक॑ । बाद म॑ एक दार्शनिक स॑ ओकरा पता चललै कि जे पौधा के खोज ओंय करी रहलऽ छै, ओकरा बदला मँ॑ वास्तव म॑ ऊ एगो किताब छेकै, जेकरऽ नाँव पंचतंत्र छै, आरू जे राजा के खजाना मँ॑ बन्द छै । ओकरा राजा स॑ किताब पढ़ै के अनुमति त॑ मिललै, लेकिन ओकरा ओकरो नकल (कॉपी) करै के अनुमति नै देलऽ गेलै । ई निर्देश क॑ नै मानतें हुअ॑, बोरजुया हर दिन जे पाठ पढ़ै छेलै ओकरा याद करी लै छेलै आरू चुपचाप ओय किताब क॑ फेरूँ स॑ फारसी मँ॑ लिखै छेलै, आरू फिर अपनऽ अनुवाद क॑ अपनऽ राजा क॑ वापस भेजी देलकै. जब॑ ऊ वापस पहुँचलै, त॑ खोसरो ओकरऽ कामों के तारीफ करलकै, आरू कहलकै कि "ई कलीलानामक किताब हम्मरऽ आत्मा क॑ नव जिनगी देलकै", आरू बोरजुया क॑ शाही खजाना स॑ ओकरा पसंद के कोय भी इनाम चुनै के ऑफर देलकै. सोना या गहना के बदला मँ॑, बोरजुया एक बढ़िया सूट के कपड़ा चुनै छै आरू ई भी कि ओकरऽ नाम कलीला के नकल (कॉपी) मँ॑ लिखलऽ जाय, "ताकि हम्मरऽ मरलऽ के बादो विद्वान लोग हमरा जे कठिनाई स॑ गुजरना पड़लै ओकरा नै भूल॑."
सेमेटिक विद्वान फ्रांस्वा द ब्लोइस (François de Blois) बोरज़ुया केरौ भारत यात्रा केरौ पाँचटा अलग-अलग संस्करण के वर्णन करै छै। ई संस्करण मँ बोरज़ुया क॑ मूल रूप सँ भारत कथी लेली भेजलऽ गेलऽ छेलै, ओकरऽ यात्रा केरौ उद्देश्य, आरू बोरज़ुया क॑ पंचतंत्र तक पहुँच कैसें मिललै, एकरऽ विवरण मँ अंतर छै।
विद्वान लोग ऐ बात प॑ असहमत छै कि ई संस्करण मँ सँ कोन पुरानऽ छै आरू पह्लवी (Pahlavi) अनुवाद केरौ लेखक तक वापस जाब॑ सकै छै, लेकिन ई बात प॑ सहमत छै कि खोसरौ केरौ भारतीय ज्ञान, खास करी क॑ राजकाज (statecraft) मँ रुचि, किताब तक पहुँचना मँ कठिनाई, आरू ऐन्हऽ ही बाकी विषय वस्तु सब मँ एकरूपता छै।
ई पर खूब बहस होय छै कि की बोरजुया आरु बोज़ोर्गमेहर एक्के आदमी छै। जद्यपि सोरोत (स्रोत) ई बात क बताबै छै कि दुन्नू अलग-अलग आदमी छै, मगर कहियो-कहियो 'बोरजुया' सब्द बोज़ोर्गमेहर के छोट रूप सेहो हुअय सकै छै.
एकरा भी देखौ
[संपादन | स्रोत सम्पादित करौ]- Academy of Gundishapur