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पढ़ते अंगिका बढ़ते अंगिका

विकिपीडिया केरौ बारे मँ
"पढ़ते अंगिका,बढ़ते अंगिका" - बहुत नीक स्लोगन छै! ई कहो की अंगिका भाष के महत्व आ प्रचार- प्रसार के बढ़ावा दै छै! एही में एगो संदेश छै जे: "जते पढ़बों अंगिका, ओते बढ़बों अंगिका|" एही के मतलब होले की - जेते ज्यादा आंगिक भाषा के पढ़ल आरू इस्तेमाल करलो जाय, ओतने अंगिका के विकास होते| प्रस्तुत छै ई स्लोगन पर एक टा सादगी अरु गर्व से भरलो कविता --
 "पढ़ते अंगिका,बढ़ते अंगिका"

माटीक गंध, बोली मधुर, अंगिका में बांटे सहर सहर| माय के गोदी जिनका मीठ, हर दिल में जे करै संगीत| पढ़ी अंगिका, सिखी हम्मा सभ| आफ्नो जड़ी के जानबे अभ| गाम-नगर, स्कूल-संसार, अंगिका बनै गर्व के द्वार| भाषा में छै संस्कृति के बात, माटि, ममता आ अपन जात| आपने पढ़बे, आपने बढ़बे, अंगिका से दुनिया पहचानते| पढ़ते अंगिका, बढ़ते अंगिका, आफ्नो भाषा, आफ्नो अभिमान