अंगिका भाषा के उत्थान लेली प्रयास
अंगिका भाषा भारत देश के बिहार राज्य के अंग प्रदेश के भाषा छै। आज दुर्भाग्य वश अपनों अस्तित्व लेली बिलखे छै।कैसे मुगल काल के बाद अंग्रेज के गुलामी के बाद क्षेत्रीय भाषा भाषी के संघर्ष शुरू होलै, राज्य बटवारा आरो भूमि परिसीमन के झोंक में 16 जनपद में से अंग जनपद के अंगिका भाषा के हजारों वर्ष पहिने ही राहुल सांकृत्यायन ने अस्तित्व प्रदान करलके दुर्भाग्य बस अपने क्षेत्र में ही कुम्हालाये रहलो छै। आय अंगिका साहित्य के नामचीन साहित्यकार सिनी हैकरो अस्तित्व लेली अनवरत प्रयास करी रहलो छै।
वर्तमान परिवेश में एकरूप प्रचार प्रसार के तरीका आरो श्रोत बढ़ावे
के आवश्यकता छै। जितना भी लोग आय अंगिका भाषा प्रेमी छै ओकरा के वर्तमान परिवेश के देखते हुए सोशल मीडिया के तमाम मंच पर यहां के सांस्कृतिक धरोहर के दिखाना आवश्यक छै।संगीत नृत्य के सभे रस के साथ रचनात्मक प्रस्तुतीकरण के समय प्रक्रिया के अपनाते हुए आवश्यक छै। जेना अन्य लोक भाषा के कंटेंट उपलब्ध है ओना ही अंगिका भाषा ले ली भी रचनात्मक के साथ गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुति से भाषा लेली जन जागरण ज़रूरी छै। बिहार के प्रचलित भाषा भोजपुरी, मैथिली,मगही, जेना ही अंगिका के व्यापक संभावना छै। आय डिजिटल मंच पर नृत्य,संगीत, नाटक,कविता के साथ हृदय स्पर्शी आरो सभै उम्र के प्रभावित करे वाला सहज,सरल, प्रस्तुतीकरण के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे वाला रचनात्मक प्रचुरता के साथ आना आवश्यक छै। ऐकरा लेली ज्यादा से ज्यादा लोग केवल रचना के साथ साथ प्रस्तुति करी के डिजिटल प्रस्तुतीकरण पर दिखाना आवश्यक छै तभे भाषा जन-जन के मन मन में रचते, बसते आरो बचते।